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अलमारी पर लौटें

बादल डाकिए की पहली डाक

भाषाहिन्दी
मौलिक कहानी

बादल डाकिए की पहली डाक

छोटे से थैले में रखा एक बड़ा वादा। चलो, मीरो के साथ उसकी पहली डाक पहुँचाने चलें।

SANYANGGAE

एक चिट्ठी का सफ़र

भेजने वाले के मन और इंतज़ार करने वाले के मन के बीच कैसा रास्ता होगा? आज एक डाकिया पहली बार उस रास्ते पर चल रहा है।

पहला थैला

बादल डाकघर के नए डाकिए मीरो ने अपना भूरा थैला कसकर बंद किया। उसके अंदर तारों की रोशनी वाली पहाड़ी पर होने वाली बैठक का एक निमंत्रण था।

सूरज डूबने से पहले

“मैं इसे सूरज डूबने से पहले ज़रूर पहुँचा दूँगा।” मीरो ने लाल मफ़लर ठीक किया और चल पड़ा। निमंत्रण का इंतज़ार कर रहे दोस्त का ख़याल आया, तो उसके कदम हल्के होकर उछलने लगे।

अचानक चली हवा

लेकिन जंगल के रास्ते पर पहुँचते ही हवा ज़ोर से चली। बारिश की बूँदें थैले पर टप-टप पड़ने लगीं और रास्ता बताने वाला छोटा-सा संकेत भी घूम गया।

थोड़ी देर रुकना

मीरो बड़े पेड़ के नीचे थैला सीने से लगाकर खड़ा हो गया। मन में जल्दी थी, फिर भी उसने बारिश हल्की होने तक इंतज़ार किया। “जल्दबाज़ी में रास्ता भटक गया, तो निमंत्रण पहुँचा ही नहीं पाऊँगा।”

चिड़िया ने दिखाया रास्ता

बारिश थमी, तो एक छोटी चिड़िया डाल पर आ बैठी। “तारों की रोशनी वाली पहाड़ी पर जा रहे हो? चमकती पत्तियों वाला रास्ता पकड़ो।” मीरो ने सिर उठाकर चिड़िया का बताया रास्ता देखा।

मिलकर मिली दिशा

मीरो और चिड़िया ने मिलकर दोराहे का संकेत सही कर दिया। “धन्यवाद। बाद में आने वाले दोस्त भी रास्ता ढूँढ़ पाएँगे।” अब रास्ता जानकर मीरो फिर उत्साह से चल पड़ा।

फटा हुआ निमंत्रण

पहाड़ी के नीचे मीरो ने थैला खोला, तो भीगे निमंत्रण का एक हिस्सा फटा हुआ था। मीरो के कान लटक गए। फटी जगह के कारण मिलने की जगह लिखे अक्षर ठीक से पढ़े नहीं जा रहे थे।

बात छिपाना नहीं

“ऐसे दूँगा, तो दोस्त को कैसे पता चलेगा कि कहाँ जाना है?” मीरो ने फटे टुकड़े करीने से जमा किए। अकेले बात छिपाने के बजाय उसने मदद माँगने का फैसला किया। छोटी चिड़िया गिलहरी को बुला लाई।

टुकड़े जोड़ते हुए

गिलहरी ने लकड़ी का एक समतल टुकड़ा दिया और चिड़िया ने कागज़ का किनारा हल्के से दबाया। मीरो ने थैले की टेप से फटी जगह चिपकाई। अलग हुए अक्षर फिर जुड़ गए।

फिर से पढ़ सकते हैं

“तारों की रोशनी वाली पहाड़ी, सूरज डूबने के समय!” तीनों ने निमंत्रण साथ पढ़ा। कोई अक्षर छूटा तो नहीं, यह जाँचकर मीरो ने विदा ली। “मेरा वादा निभाने में मदद करने के लिए धन्यवाद।”

साँझ में पहुँची डाक

जब आसमान आड़ू जैसे गुलाबी रंग में रंगा, मीरो आख़िर पहाड़ी पर पहुँच गया। उसने इंतज़ार करते दोस्त को निमंत्रण दिया और ईमानदारी से बताया कि वह बारिश में भीगकर फट गया था।

मन की बात भी पहुँची

दोस्त ने चिपकाया हुआ निमंत्रण पूरा खोल लिया। “साफ़ पढ़ा जा रहा है! अंत तक इसे लाने के लिए धन्यवाद।” मीरो का थैला हल्का हो गया और उसका मन दोस्तों की स्नेह भरी आवाज़ों से भर गया।

आओ, बात करें

मीरो को वादा निभाने में किसने क्या मदद की? कोई मुश्किल आए, तो तुम किससे मदद माँगना चाहोगे?

अगली डाक का इंतज़ार

पहली डाक पहुँच गई। अब मीरो जानता है कि ज़िम्मेदारी निभाने के रास्ते में थोड़ी देर रुकने का साहस और मदद माँगने की आवाज़ भी साथ चलते हैं।

सामान्य पठन में सभी पन्नों के शब्द और चित्र क्रम से दिखाई देते हैं।

मौलिक कहानी · वादा और ज़िम्मेदारी

खरगोश मीरो पहली बार डाक पहुँचाने निकला। आँधी-बारिश और फटे निमंत्रण से जूझते हुए, मीरो अपने दोस्तों के साथ वादा निभाने का रास्ता खोजता है।